Now 12:45AM Akele rhna hi behtar hai muskil wqt me koi sath nhi rhta sb sath chhodne ki bat krte hai.
तो यार स्वागत है आपका मेरे इस सपनो की दुनिया में जिसमें मैं अपने थॉट को आपके साथ शेयर करता हूँ जो हमेशा काल्पनिक रहती है। तो पढ़िए ये कुछ लाइने.. कभी शिकायत खुद से होती है कि ऐसा क्यों है तूं.. अंदर से आवाज आती है तूं ऐसा है इसमें बुराई ही क्या है.. फिर आवाज आती है मैं क्यों अपने आप को बुरा कह रहा हूँ.. क्या सच मे तूं इतना बुरा है खुद को बुरा कह रहा है.. नही जो कह रहा है वो दुनिया के तौर तरीकों को देख कर कह रहा है.. अगर इतनी ही बुराई तुझमें होती तो तूं आज जिंदा न होता.. या जो तुम्हें बुरा कह रहा है वो न होता.. तो तूं जैसा है वैसा ही ठीक है इसमें क्या बुराई है.. बुराई कुछ भी नही फिर बुरा क्यों लग रहा है.. क्या उसके कारण जिसे तूं अच्छा समझता था नही उसे क्या पता मैं किसी को क्या समझता हूं शायद मैं गलत समझू लेकिन वो तो अच्छा ही है.. नही अच्छा ही क्यों हर कोई अपने जगह पर सही है.. तो खाली परेशान होने का कोई मतलब नही है.. हां नही है.. न मैं सही हूँ न वो सही है जो पल है जैसा है वो सही है। कभी कभी बातें ऐसे हो जाती है जिसे बयान क...