Now 12:45AM Akele rhna hi behtar hai muskil wqt me koi sath nhi rhta sb sath chhodne ki bat krte hai.
तो यार स्वागत है आपका मेरे इस सपनो की दुनिया में जिसमें मैं अपने थॉट को आपके साथ शेयर करता हूँ जो हमेशा काल्पनिक रहती है। तो पढ़िए ये कुछ लाइने..
Kabhi Shikayat Khud Se Hoti Hai Poem By Khilawan patel ki yaha kavita though aur self questioning par hai jo hai tuti phuti hai mere liye kavita hai
कभी शिकायत खुद से होती है कि ऐसा क्यों है तूं..
अंदर से आवाज आती है तूं ऐसा है इसमें बुराई ही क्या है..
फिर आवाज आती है मैं क्यों अपने आप को बुरा कह रहा हूँ..
क्या सच मे तूं इतना बुरा है खुद को बुरा कह रहा है..
नही जो कह रहा है वो दुनिया के तौर तरीकों को देख कर कह रहा है..
अगर इतनी ही बुराई तुझमें होती तो तूं आज जिंदा न होता..
या जो तुम्हें बुरा कह रहा है वो न होता..
तो तूं जैसा है वैसा ही ठीक है इसमें क्या बुराई है..
बुराई कुछ भी नही फिर बुरा क्यों लग रहा है..
क्या उसके कारण जिसे तूं अच्छा समझता था
नही
उसे क्या पता मैं किसी को क्या समझता हूं
शायद मैं गलत समझू लेकिन वो तो अच्छा ही है..
नही अच्छा ही क्यों
हर कोई अपने जगह पर सही है..
तो खाली परेशान होने का कोई मतलब नही है..
हां नही है..
न मैं सही हूँ न वो सही है जो पल है जैसा है वो सही है।
कभी कभी बातें ऐसे हो जाती है जिसे बयान करना बहुत ही बुरा होता है..
पर मेरे लिए अच्छा बुरा दोनों सही है और क्योकि मेरे दिल मे किसी को लेकर कोई गलत भाव नही है तो मुझसे सही कोई नही है।
I am unique in the world
Kabhi Shikayat Khud Se Hoti Hai Poem By Khilawan patel ki yaha kavita though aur self questioning par hai jo hai tuti phuti hai mere liye kavita hai
Thanks mma इस दुनिया में लाने के लिए।

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