Now 06:04AM
मैं अधर्मी हूँ या धर्मी हूँ केशव मेरे कर्म तो यही कहते हैं कि मैं अधर्म कर रहा हूँ और अधर्म करने से नहीं रोक पा रहा हूँ।
क्या ऐसा नहीं हो सकता मुझे दुख भी न हो और अधर्म भी न हो सच कहो तो मैं क्या कर रहा हूँ?
इस प्रश्न का जवाब कौन देगा माधव 🙏
क्या ये प्रश्न भी किसी हेतु से आता है क्या है वजह ?
https://youtube.com/shorts/hWglGTo0lJ8?si=9Yhn7uK3AFzHLZm8
Now 06:22AM
इसी बात को सोचते 2 आ रहा था तो मन में ये आया मैं अकारण ही चिंता कर रहा हूँ जो हो गया सो हो गया केशव और धर्म अधर्म इंसान की अपनी परिभाषा है वो जो उसको सुख दे वहीं उसे अपनी धर्म समझता है लेकिन सही मायने में जो समाज के लिए उचित है वहीं धर्म है। इसलिए जो भी हो केशव मैं अपने जीवन को कभी अधर्मी कर्म करने की इजाजत नहीं दे सकता।
मुझे वहीं आचरण करना चाहिए जो लोगों के हित में हो समाज के हित में हो क्योंकि वहीं मेरे हित में होंगे।
इस आत्मा की आवाज को ही मैं अपनी आवाज मानता हूं केशव आपकी कृपा हमेशा मुझपर बनी रहे मेरे अपनों पर बनी रहे।
कोई कृपा पात्र न हो ऐसा तो हो ही नहीं सकता केशव 😊 सुख और दुख उसके अपने कर्म की वजह से है आपकी कृपा से तो हमेशा कल्याण ही हुआ है। 🙏
Now 07:32PM
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