Now 03:47AM
मुझे लगता था मेरे दादा की यादें वैसे की वैसे रहेंगी मैं याद करके दुखी होता रहूँगा की 16 सितंबर को मुझे छोड़कर चले गए।
लेकिन भगवान श्री कृष्ण ने सही कहा है समय के साथ दुख लगना भी कम हो जाता है ऐसा नहीं है कि मुझे दुख नहीं हो रहा लेकिन पहले जैसा उसी दिन याद आये ऐसा पिछले सालों से जब से वो गए हैं तब से ऐसा नहीं हुआ था।
मुझे 15 तारीख को याद आया था कि 16 सितंबर को दादा ने अपने इस भौतिक जींवन से अलविदा कहा था। लेकिन उस दिन मैं लिख नहीं पाया था और 16 को तो कुछ याद ही नही आया।
वो जहां भी रहें उनकी कृपा मुझ पर बनी रहे उन्होंने जो लिखा है याद के रूप में मैंने रखा हुआ है और कभी समय मिले तो स्कैन करके उसे ड्राइव में रखकर पब्लिश करूँगा।
उसे मैं अपनी डायरी का हिस्सा बनाना चाहता हूं पता नहीं क्या होगा लेकिन मैं ये सिलसिला जारी रखूंगा यादें बनाता रहूँगा और जींवन के अंत तक ये चलता रहेगा।
एक बात समझ आयी सबकुछ निमित्त मात्र है जब तक हैं खुशी 2 जीने में ही परम आनन्द है।
राधे राधे सुप्रभात 🥰 आप जो भी हैं पढ़ रहे हैं मुझसे जुड़े हुए हैं उसके लिए।
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